उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 (UP Panchayat Election 2026) से पहले योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा सियासी दांव चल दिया है। उन्होंने ‘कोटे में कोटा’ (OBC उपवर्गीकरण) की मांग फिर से तेज कर दी है। इसी मुद्दे को लेकर राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की भी बात कही है।
क्या है यूपी पंचायत चुनाव में ‘कोटे में कोटा’ की मांग?
Quota within quota demand in UP Panchayat Election 2026
ओपी राजभर का कहना है कि OBC और SC वर्ग में अति पिछड़ी और सर्वाधिक पिछड़ी जातियों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए जरूरी है कि आरक्षण के भीतर उपवर्गीकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि 27% OBC आरक्षण को तीन हिस्सों में बांटा जाए।
- 7%–पिछड़ी जातियों के लिए
- 9%–अति पिछड़ी जातियों के लिए
- 11%–सर्वाधिक पिछड़ी जातियों के लिए
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया। इसमें अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण की अनुमति दी गई है।
ओबीसी आरक्षण उप वर्गीकरण
OBC sub-categorization demand
राजभर ने बताया कि यह मांग कोई नई नहीं है। वर्ष 2001 में राजनाथ सिंह सरकार में बनी हुकुम सिंह समिति ने भी यही सिफारिश की थी कि OBC आरक्षण का उप वर्गीकरण होना चाहिए। समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, लेकिन सरकार का कार्यकाल खत्म होने के कारण रिपोर्ट लागू नहीं हो सकी।
सामाजिक न्याय समिति रिपोर्ट
Social Justice Committee Report UP
इसके बाद बसपा और सपा की सरकारें रहीं लेकिन इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया गया। फिर 2017 में बीजेपी सरकार बनने के बाद न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह समिति बनाई गई। इस समिति ने भी 27% आरक्षण को तीन हिस्सों में बांटने की सिफारिश की थी। इसे अब तक लागू नहीं किया गया।
राजभर की राजनीति और बयानों से हलचल
ओपी राजभर हाल ही में तब चर्चा में आए जब उन्होंने अखिलेश यादव को उनके जन्मदिन पर तस्वीर के साथ बधाई दी। इससे सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। गौरतलब है कि राजभर ने 2017 में बीजेपी के साथ रहते हुए कैबिनेट मंत्री पद संभाला था। लेकिन, बाद में मतभेदों के चलते योगी सरकार से बर्खास्त हो गए।
2022 विधानसभा चुनाव में सपा से गठबंधन किया। लेकिन, विशेष सफलता न मिलने पर दोबारा बीजेपी के साथ लौट आए। इसके बाद फिर से मंत्री बन गए।
पंचायत चुनाव में अति पिछड़ों को आरक्षण की मांग
Demand for reservation for backward sections in Panchayat elections
ओपी राजभर अब पंचायत चुनाव से पहले OBC और SC आरक्षण में अति पिछड़ी जातियों को अलग से कोटा देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में केवल कुछ ही OBC जातियां आरक्षण का लाभ उठा पा रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिस भर्ती परीक्षा में भी 27% OBC आरक्षण में 19000 से ज्यादा सीटें मजबूत OBC जातियों को ही मिली हैं।
यह भी पढ़ेंः- Panchayat Chunav Matdata Suchi Sanshodhan: पंचायत चुनाव से पहले बड़ा अलर्ट, ऐसे जुड़वाएं वोटर लिस्ट में अपना नाम
आरक्षण उप वर्गीकरण के लिए कानून जरूरी
Law is necessary for reservation sub-categorization
राजभर ने कहा कि “कोटे में कोटा” लागू करने के लिए विधानमंडल में कानून बनाना जरूरी है। वे इसके लिए सरकार को राजी करने की हर संभव कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सदन में आश्वासन दिया था कि सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू की जाएगी, लेकिन अब तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ है।
यह भी पढ़ेंः- UP Gram Panchayat Election 2026: प्रधान या बीडीसी प्रत्याशी की उम्र कितनी हो? योग्यता और जरूरी गाइडलाइंस; जानें हर बात
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल… (FAQs)
1. ओपी राजभर ने यूपी पंचायत चुनाव 2026 से पहले क्या मांग रखी है?
उत्तर: ओपी राजभर ने यूपी पंचायत चुनाव 2026 से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर OBC और SC आरक्षण में ‘कोटे में कोटा’ की मांग रखी है। वे चाहते हैं कि अति पिछड़ी और सर्वाधिक पिछड़ी जातियों के लिए अलग से आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
2. ‘कोटे में कोटा’ क्या है और इसका क्या उद्देश्य है?
उत्तर: ‘कोटे में कोटा’ का मतलब OBC आरक्षण को तीन हिस्सों में बांटना है—पिछड़ी जाति (7%), अति पिछड़ी जाति (9%) और सर्वाधिक पिछड़ी जाति (11%)। इसका उद्देश्य पिछड़े वर्ग की उन जातियों को आरक्षण का लाभ दिलाना है जिन्हें अब तक इसका उचित लाभ नहीं मिल पाया।
3. क्या ‘कोटे में कोटा’ की मांग पहले भी उठी है?
उत्तर: जी हां, 2001 में राजनाथ सिंह सरकार में हुकुम सिंह समिति और 2017 में योगी सरकार में न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह समिति ने इस उपवर्गीकरण की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।
4. ओपी राजभर की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या रही है?
उत्तर: ओपी राजभर 2017 में बीजेपी के साथ मंत्री बने थे, फिर मतभेदों के चलते बर्खास्त हो गए। 2022 में सपा के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता न मिलने पर फिर से बीजेपी में शामिल होकर कैबिनेट मंत्री बने। वे अक्सर आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते हैं।
5. क्या ओबीसी में उपवर्गीकरण के लिए कानून बनाना जरूरी है?
उत्तर: हां, ओपी राजभर का कहना है कि ‘कोटे में कोटा’ लागू करने के लिए विधानमंडल में प्रस्ताव लाकर कानून बनाना आवश्यक होगा, ताकि यह कानूनी रूप से वैध हो सके और सभी वर्गों को आरक्षण का न्यायपूर्ण लाभ मिल सके।
https://x.com/oprajbhar/status/1941066641770504433