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डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट और गृह मंत्रालय सख्त: फर्जी CBI-पुलिस कॉल से ठगी का नया पैंतरा, जानिए बचाव के 5 कानूनी नियम

Digital Arrest Cyber Fraud Rules: देश भर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर आम नागरिकों, बुजुर्गों और कारोबारियों से करोड़ों रुपये की ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, जांच एजेंसियों और राज्यों की पुलिस को इस सिंडिकेट के खिलाफ तत्काल संयुक्त टास्क फोर्स बनाकर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं साइबर सुरक्षा विंग ने स्पष्ट किया है कि भारत के कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।

क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’ का यह नया फ्रॉड?

साइबर अपराधी पीड़ित को वीडियो कॉल या फोन कॉल के जरिए निशाना बनाते हैं। वे खुद को CBI, ED, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) या किसी राज्य की पुलिस का बड़ा अधिकारी बताते हैं।

  • वे पीड़ित को डराते हैं कि उसके नाम पर भेजे गए किसी पार्सल में ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट या अवैध धन पकड़ा गया है।
  • कॉल के दौरान बैकग्राउंड में फर्जी पुलिस स्टेशन का सेटअप, आधिकारिक लोगो और फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया जाता है।
  • पीड़ित को घंटों तक कैमरे के सामने बैठे रहने को मजबूर किया जाता है और इसे ‘डिजिटल कस्टडी’ या ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम दिया जाता है।
  • मामला रफा-दफा करने या ‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर बैंक खाते की पूरी जमा पूंजी किसी अज्ञात खाते में ट्रांसफर करवा ली जाती है।

गृह मंत्रालय और कानून के 5 सबसे अहम नियम

भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आपराधिक प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हर नागरिक को इन 5 बुनियादी कानूनी अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए:

  1. वीडियो कॉल पर कभी नहीं होती गिरफ्तारी: भारत का कोई भी कानून, पुलिस विभाग या केंद्रीय एजेंसी (CBI/ED) वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या कस्टडी में नहीं ले सकती।
  2. सरकारी खाते में सीधे पैसे मंगाने का नियम नहीं: कोई भी कानूनी संस्था केस के सत्यापन के लिए निजी बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने की मांग नहीं करती।
  3. समन का लिखित प्रारूप: किसी भी जांच के लिए आधिकारिक समन लिखित डाक, ईमेल या अधिकृत पुलिसकर्मी द्वारा व्यक्तिगत रूप से दिया जाता है।
  4. कॉल तुरंत काटें: यदि कोई खुद को जांच अधिकारी बताकर डराए, तो घबराने के बजाय तत्काल कॉल काट दें और स्थानीय थाने से संपर्क करें।
  5. राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत: किसी भी संदिग्ध कॉल या ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 डायल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

सुप्रीम कोर्ट ने टेलिकॉम कंपनियों को क्या निर्देश दिए?

सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार विभाग (DoT) और टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को अंतरराष्ट्रीय स्पूफ कॉल्स (International Spoofed Calls) को ब्लॉक करने की प्रणाली को और मजबूत करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही बैंक खातों में अचानक होने वाले संदेहास्पद बड़े लेन-देन पर रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम अनिवार्य करने की बात कही गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्र. अगर किसी के साथ डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी हो जाए तो क्या करें?
उत्तर: ठगी होते ही गोल्डन ऑवर (पहले 2 से 3 घंटे) के भीतर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। इससे बैंक ट्रांजैक्शन को फ्रीज करवाकर आपके पैसे वापस मिलने की संभावना 90% तक बढ़ जाती है।

प्र. क्या व्हाट्सएप या स्काइप पर पुलिस अधिकारी बयान दर्ज कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं, बिना कानूनी अनुमति और कोर्ट के निर्देश के किसी भी नागरिक को व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर कस्टडी में नहीं रखा जा सकता।