उत्तर प्रदेश में ग्रामीण संपत्ति अधिकारों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। यह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से हो रहा है। प्रदेश में अब तक एक करोड़ से अधिक घरौनियों का वितरण (Gharauni Distribution) किया जा चुका है। इससे गांवों में दशकों से चले आ रहे भूमि और मकान संबंधी विवादों में जबरदस्त कमी आई है।
स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी वाली जमीन पर बसे परिवारों को उनके घर और भूखंड का कानूनी ‘स्वामित्व प्रमाण पत्र’ यानी ‘घरौनी’ दी जा रही है। यह प्रमाण पत्र न केवल संपत्ति पर अधिकार को स्पष्ट करता है, बल्कि बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और अन्य वित्तीय सुविधाओं तक पहुंच का मजबूत आधार भी बन रहा है।
एक करोड़ घरौनियों का वितरण हो चुका
राजस्व विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यूपी के 72,961 गांवों में प्रपत्र-10 (डिजिटाइज्ड) जारी किए जा चुके हैं। यह कुल सर्वे योग्य गांवों का करीब 80.59 फीसदी हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति का रिकॉर्ड पहली बार डिजिटल और पारदर्शी रूप में उपलब्ध हो पाया है।
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बताते चलें कि सहमति के आधार पर अब तक 1,14,43,688 घरौनियां तैयार की गई हैं। इनमें से 1,01,31,232 घरौनियों का वितरण किया जा चुका है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करती है।
घरौनी से मिलेगा बैंक लोन
विशेषज्ञों के अनुसार, घरौनी मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर कानूनी सुरक्षा मिली है। इससे आपसी विवादों में कमी आई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। लोग अब अपने मकान को संपत्ति के रूप में उपयोग करके बैंक से ऋण लेने, स्वरोजगार शुरू करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सक्षम हो रहे हैं।
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सरकार का लक्ष्य शेष गांवों में भी जल्द सर्वे और वितरण प्रक्रिया पूरी कर हर ग्रामीण परिवार को संपत्ति का विधिक अधिकार उपलब्ध कराना है। ताकि, गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।


