Child Abuse Case मुख्य बिंदु
- 34 बच्चों के यौन शोषण का मामला
- डार्कवेब पर वीडियो बेचने का आरोप सिद्ध
- दंपती को फांसी की सजा
- प्रत्येक पीड़ित को 10 लाख मुआवजा
- 34 वीडियो व 679 तस्वीरें बरामद
- 24 पीड़ित बच्चों सहित 74 गवाह
- इंटरपोल सूचना से खुला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में सामने आए 34 बच्चों के यौन शोषण (Child Abuse Case) के जघन्य मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने ऐतिहासिक और कठोर फैसला सुनाया है। अदालत ने चित्रकूट के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन कुशवाहा और उसकी पत्नी दुर्गावती को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर बच्चों का यौन शोषण करने, उनके अश्लील वीडियो और तस्वीरें बनाने तथा डार्कवेब के माध्यम से विदेशों में बेचने का आरोप सिद्ध हुआ।
मासूम बच्चों का जीवन बर्बाद किया
विशेष पॉक्सो न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 163 पृष्ठों के विस्तृत फैसले में इस अपराध को “जघन्यतम” बताते हुए कहा कि दोषियों का नैतिक पतन अत्यंत गंभीर है और समाज में ऐसे अपराधों के प्रति कठोर संदेश देने के लिए सर्वोच्च दंड आवश्यक है। अदालत ने यह भी कहा कि अपराध कई जिलों में फैलाकर संगठित तरीके से किया गया और इसमें मासूम बच्चों का जीवन बर्बाद किया गया।
बच्चों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही आरोपियों के घर से बरामद धनराशि भी पीड़ितों में समान रूप से वितरित की जाए। अदालत ने रामभवन पर 6.45 लाख रुपये तथा दुर्गावती पर 5.40 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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जांच में सामने आया कि यह अपराध केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था। मामले में 34 बच्चों के शोषण, 74 गवाहों की गवाही और 47 देशों तक जुड़े डिजिटल नेटवर्क के संकेत मिले। अदालत ने एक तीसरे आरोपी की फाइल अलग कर दी है, जिस पर ई-मेल के माध्यम से जानकारी साझा करने का आरोप है।
इंटरपोल ने खोली पोल
पूरे मामले का खुलासा अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल की सूचना के बाद हुआ। इंटरपोल ने दिल्ली स्थित सीबीआई को ई-मेल भेजकर बताया कि आरोपी डार्कवेब के जरिए बच्चों के अश्लील वीडियो विदेशों में बेच रहा है। इसके बाद सीबीआई ने विस्तृत जांच शुरू की और अक्टूबर 2020 में प्राथमिकी दर्ज की। नवंबर 2020 में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
तीन वर्ष तक के बच्चों का शोषण
जांच के दौरान आरोपियों के पास से पेन ड्राइव में 34 वीडियो और 679 अश्लील तस्वीरें बरामद हुईं। यह भी सामने आया कि तीन वर्ष तक के बच्चों को शोषण का शिकार बनाया गया। बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और आसपास के क्षेत्रों से बच्चों को निशाना बनाया गया था।
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मामले की सुनवाई के दौरान 74 गवाह अदालत में पेश हुए, जिनमें 24 पीड़ित बच्चे भी शामिल थे। साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया।
बांदा में पहली बार किसी महिला को मृत्युदंड
यह फैसला कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। बांदा में पहली बार किसी महिला दोषी को मृत्युदंड दिया गया है। विशेष अदालत द्वारा हाल के महीनों में बच्चों के विरुद्ध अपराधों में कठोर सजा देकर कड़ा संदेश देने की कोशिश की गई है।
यह मामला समाज को झकझोर देने वाला है और बच्चों की सुरक्षा, डिजिटल अपराधों की निगरानी तथा सामुदायिक जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।



